जड़ों से जुड़ाव: दुबई में कमाकर रमेश बाबल गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक बदलाव की लिख रहे हैं दास्तां

 जड़ों से जुड़ाव: दुबई में कमाकर रमेश बाबल गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक बदलाव की लिख रहे हैं दास्तां


जड़ों से जुड़ाव: दुबई में कमाकर ‘रमेश बाबल’ गांव में शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक बदलाव की लिख रहे हैं दास्तां


जब भी पश्चिमी राजस्थान का जिक्र होता है रेतीली छवि मन मस्तिष्क के अंदर उभर जाती है। जहां दूर-दूर तक मरुस्थलीय धोरों के मध्य झरनों से बहती मिट्टी, दरख़्तों के नाम पर कहीं कहीं खेजड़ी और मेह तो साल-दो में एक-आध बार होता है। पर यहां के लोग बड़े ठीमर, संघर्षों की बयार में खेजड़ी सी मजबूती के साथ खड़े नेह का हाथ बढ़ाए मिलते हैं। संघर्षों के थपेडों में सुदृढ़ता के साथ कर्मठता से जीवन जीते यहां के लोगों ने बदलते बरसों के साथ बहुत बदवाल देखें हैं। बस नहीं बदला है तो वो यहां के लोगों के तौर-तरीके, जिन्हें यहां की सांस्कृतिक परंपरा कहें तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। बदलते परिवेश में खुद को खपाकर भी अपनी औलादों को शिक्षित ही नहीं किया बल्कि उनमें संस्कारों का बीजारोपण यहां के लोग करते आए हैं। यही वजह है की मारवाड़ के लोगों ने खुब तरक्की की देश-विदेश में शोहरत हासिल की लेकिन संस्कारों से बंधे रहे। अपनी जड़ों से जुड़ाव के कारण अपने परिवार, समाज, गांव व देश की तरक्की में सहायक बने। शिक्षा, स्वास्थ्य व सामाजिक क्षेत्र में सहायक बनकर यहां के लोगों के जीवन स्तर में ‌सुधार किया। ऐसे ही सफल लोगों में से एक हैं रमेश बाबल जिन्होंने सात-समंदर पार रहकर भी अपने परिवार, समाज व गांव में शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक के स्तर को सुधारने में महत्ती भूमिका ही नहीं निभाई बल्कि धार्मिक संस्कार व पर्यावरण संरक्षण भी किया  ।


जीवन परिचय:

रमेश बाबल का जन्म सुदूर मरुस्थल में बसे जोधपुर जिले के गांव फिटकासनी के एक किसान परिवार में हुआ। दादा श्री धोंकलराम किसान थे। पिता श्री किसनाराम बाबल ने पारिवारिक पेशे ‘खेती’ को अपनाया लेकिन अपनी संतानों को शिक्षित व संस्कारित करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। रमेश तीन भाई-बहन में सबसे बड़े हैं। शिक्षा में स्नातक करने के पश्चात एमबीए (मार्केटिंग) की डिग्री हासिल कर यूरोप, मध्य पूर्व एशिया एवं अफ्रीका के विभिन्न देशों में बतौर आईटी प्रोफेशनल अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में आईटी एवं प्रबंध क्षेत्र में सेवाएं देते रहे हैं। वर्तमान में यूएई बेस्ड  आईबीएम कंपनी (इंटरनेशनल बिजनेस मशीन) में आईटी प्रोजेक्ट हेड के पद पर कार्यरत हैं। मंझले भागीरथ बिश्नोई, बीमा के क्षेत्र में ख्यातनाम ‘टाटा इंश्योरेंस कंपनी’ में वरिष्ठ शाखा प्रबंधक के पद पर सेवाएं दे रहे है। बहन प्रियंका बिश्नोई राजकीय विद्यालय में प्रधानाध्यापिका है।



प्रोफेशन के साथ सेवाएं भी

रमेश बाबल युएई में रहकर अपने प्रोफेशन के साथ ही साथ वहां होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हैं और अपनी सेवाएं भी देते हैं। वर्ष 2019 में अबू धाबी में आयोजित ओलंपिक वर्ल्ड गेम में योगदान के लिए यूएई सरकार व आईबीएम कंपनी द्वारा सम्मान किया वही ‘दुबई एक्स्पो 2020’ में स्वयं सेवक के रूप में भाग लिया और सेवाएं दी जिनके लिए आपको यूएई सरकार द्वारा मेडल, मोमेंटो व उपहार देकर सम्मानित किया। 



अपने क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कार व सामाजिक जीवन के स्तर को सुधारने में है प्रयासरत


रमेश मारवाड़ की ‘नेह की भावना’ को देखते हुए बड़े हुए। जिसका गहरा असर इनके मन-मस्तिष्क पर पड़ा। यही कारण है कि जब पढ़ लिखकर काबिल बने तो अपने क्षेत्र को आगे बढ़ाने का निश्चय किया। लोगों में धार्मिक भावना को बढ़ावा देने के लिए ‘जाम्भाणी साहित्य अकादमी’ के साथ मिलकर संस्कार शिविर का आयोजन करवाए। कोरोना महामारी के मध्य जर्जर हालत में पड़े गांव के उप-स्वास्थ्य केंद्र का पुनर्निर्माण/जिर्णोद्धार करवाया ताकि लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ मुहैया हो सके, स्वास्थ्य संबंधित कैम्प लगाए‌ जिसमें ग्रामीणों ने निशुल्क स्वास्थ्य लाभ लिया। शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्ती भूमिका निभाते हुए राजकीय विद्यालय रशीदा फिटकासनी में स्टेज/मंच का निर्माण करवाया,  शिक्षकों की कमी को पूरा करते हुए शिक्षकों की व्यवस्था निजी स्तर करने का कार्य बखुबी करते आए हैं। इतना ही नहीं श्री बाबल विभिन्न जगहों पर लाइब्रेरी स्थापनाओं में भी अपना व्यक्तिगत सहयोग देकर समाज, गांव व क्षेत्र के प्रति जिम्मेदार नागरिक का फर्ज निभा रहे हैं। 



सम्मान

शिक्षा, स्वास्थ्य व सामाजिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए आपको व परिवार के राजस्थान सरकार द्वारा ‘भामाशाह’ स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। समाज में साहित्यिक क्षेत्र में सहयोग देने के लिए ‘पांचवे युवा सम्मेलन, लालासर साथरी’ में महंत स्वामी सच्चिदानंद जी आचार्य द्वारा सम्मानित किया गया।



समाज के प्रति समर्पण को देखते हुए महासभा में एनआरआई प्रकोष्ठ के संयोजक बनाए


रमेश बाबल की गुरु जाम्भोजी में गहरी आस्था व जाम्भाणी साहित्य व संस्कृति में गहरी रूचि है। विदेश में रहकर भी इनकी जाम्भाणी परम्पराओं और धार्मिक संस्कारों का निष्ठा से निर्वहन करते हैं। समय समय पर आप प्रवासी बिश्नोईयों को एकत्रित कर जाम्भाणी जन जागरण कार्यक्रम आयोजन करते आए हैं। बाबल की नेतृत्व क्षमता और समाज व धर्म के प्रति रूचि को देखते हुए ‘अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा’ ने एनआरआई प्रकोष्ठ का गठन कर उन्हें ‌संयोजक मनोनीत किया। 


वेश्विक पटल पर जाम्भोजी के संदेश और बिश्नोईयों की परम्परा को मिलेगा सम्मान


रमेश बाबल के प्रयास से महासभा व जाम्भाणी साहित्य अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में दुबई में ‘अंतर्राष्ट्रीय जाम्भाणी पर्यावरण सम्मेलन’ का आयोजन माह दिसम्बर में किया जा रहा है।

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